ग्रामीण विकास के आयाम एवं आजीविका सुरक्षा पर भव्य संगोष्ठी 01-03-2019


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आज दिनांक 01.03.2019  को महाराजा अग्रसैन महाविद्यालय जगाधरी में हरियाणा उच्चतर शिक्षा आयोग के सौजन्य से ‘ग्रामीण विकास के आयाम एवं आजीविका सुरक्षा’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ जिसका उद्घाटन मुख्यवक्ता डॉ.मोहिन्द्र सिंह पूर्व अध्यक्ष लोक प्रशासन विभाग कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र ने ज्योति प्रज्वलन कर किया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. पी.के.बाजपेयी  व उप प्राचार्य डॉ. करूणा द्वारा मुख्य अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ प्रदान कर किया। इस अवसर पर बीज वक्तव्य (की-नोट) डॉ. मोहिन्द्र सिंह जी ने प्रस्तुत  किया। डॉ. सिंह ने मुख्य रूप से लालफीताशाही व आम ग्रामीण जनता में ताल मेल न होने व योजनाओं को ठीक से लागू न करने, भ्रष्टाचार का फैलना ‘ग्रामीण विकास को अवरूद्ध करने वाला बताया। केवल आंकड़ों से विकास नहीं मापा जा सकता है। उद्घाटन सत्र में उद्घाटन भाषण  डॉ. सुरेन्द्र सिंह मोर द्वारा प्रस्तुत किया गया। डॉ मोर ने विभिन्न  योजनाओं को सिलसिलेवार आंकड़े प्रस्तुत कर पूरे भारत  के राज्यों के विकास को प्रस्तुत किया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. पी.के.बाजपेयी द्वारा सभी मुख्य अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय पर प्रकाश डाला गया। डॉ. बाजपेयी ने ग्रामीण विकास व खाद्य सुरक्षा आजीविका के विषय पर सरकारी नजरीय व आधुनिक योजनाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. बाजपेयी ने आज तक हुए ग्रामीण विकास पर पूर्ण प्रकाश डालते हुए प्रतियोगिता की जिज्ञासा को शान्त किया।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ.पवन कुमार त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में विषय के मूल उद्देश्य को प्रस्तुत कर, संगोष्ठी के बीज व मूल को विस्तार रूप देने का काम किया। उन्होंने विषय को सभी आयामों की दृष्टि से प्रस्तुत किया। 
उप प्राचार्य डॉ. करूणा द्वारा सभी अतिथियों का विस्तृत परिचय दिया गया व उनके आगमन पर तहदिल से धन्यवाद किया।
जल पान के उपरान्त तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेडी के निदेशक डॉ. अतर सिंह रहे, डॉ. अतर सिंह ने लगभग 1960 से सन् 2019  तक के हरियाणवी ग्रामीण विकास के आयामगत विकास के इतिहास  को संस्मरणात्मक ढ़ंग से प्रस्तुत किया। डॉ. अतर सिंह ने कई सरकारी योजनाओं को पुनः सोच विचार कर लागू करने को कहा। घर में समझदार महिला हो तो सभी परिवार के सदस्यों की आजीविका का भली भांति प्रबन्ध कर सकती है। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. मोहिन्दर सिंह द्वारा की गई व धन्यवाद ज्ञापन  डॉ. पवन कुमार त्रिपाठी द्वारा किया गया। मंच संचालन को डॉ. बहादुर सिंह ने बखूबी संभाला। संगोष्ठी में देश भर के महाविद्यालयों से लगभग 200 से उपर प्रतिभागियों ने भाग लिया व अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों  ने संगोष्ठी में सहभागिता करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।  अन्तिम सत्र में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों द्वारा शोध पत्र पढ़े गए। इनमें डॉ. दिव्या मंगा, डॉ. मोनिका डारा, डॉ.मीनू जैन, डॉ. सीमा सेठी, डॉ. अनिल कुमार ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से  विषय के साथ न्याय करने का प्रयास किया। डी.आई.सी. के सहायक निदेशक श्री दीपक नरवाला में उद्योग स्थापित करने हेतु  विभिन्न प्रकार के सबसीडी युक्त लोन योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।